🌟Favouritism…

असलियत..अहमियत…और..अहम् ये तीन शब्द मात्र नही हैं,ध्यान से समझा जाए तो इसमें हमें वर्तमान जीवन का सार नज़र आएगा!! जीवन में बहुत सारे ऐसे वक़्त आते हैं जहाँ हमें ये महसूस होता हैं कि जैसे हमारी कोई अहमियत हीं नही हैं अपनो के बीच…बहुत सारे जज़्बात उमड़ के सामने आने लगते हैं जब हम किसी अपने के नज़र में खुद की वजूद को तलाश करने की कोशिश करते हैं परन्तु सब बेकार होता रहता हैं !! 

ज़िन्दगी में सब कुछ परिवर्तनशील हैं तो फिर हम क्यूँ किसी से उम्मीद रखते हैं कि वो कभी नही बदलेगा…

बदलना तो हैं ही उसे..कभी वक़्त के साथ,कभी लोगों के साथ,कभी अपनी सोच के साथ…अपनों में हुए उस बदलाव को हीं हम समय से स्वीकार नही कर पाते और खुद को हीं तकलीफ देते हैं!! हमारा अहम्…हम अपने अहम् में इस कदर डूबे रहते हैं कि ये सोचने लगते हैं..वो मेरा भाई/बहन/दोस्त होकर भी मेरे साथ ऐसे कैसे कर सकता हैं..पहले तो उसने कभी ऐसा नही किया…मैं तो उसे इतना प्यार करती/करता हूँ फिर भी उसने ऐसा क्यूँ किया…बस,यही सब हमें और दुखी कर जाता हैं!! हम ये बिल्कुल सोच हीं नही पाते की जिसे हम अपना कह रहे हैं हो सकता हैं उसके लिए हम उतने अहमियत नही रखते हो…जितना वो हमारे लिए रखता हैं!! किसी को हम जबरदस्ती खुद से प्यार तो नही करवा सकते हैं न ही खुद की इज़्ज़त ये तो वो चीज़ हैं जो दूसरे के दिल में खुद ब खुद आनी होती है!! जैसे..मान लीजिये आप किसी से बहुत प्यार करते हैं और उसकी दि हुई कोई चीज़ आपके लिए बहुत मायने रखती हैं..और अचानक वो चीज़ कुछ पल के लिए आपके नज़रों से दूर चली जाये तो आप इस कदर बेचैन होकर उस चीज़ को ढूंढते है मानो वो नही मिली तो क्या हो जायेगा..और उस वक़्त आपके सामने जो भी आ रहा हो उसपे आप बिना सोचे समझे ये इल्ज़ाम लगा दो कि वो चीज़ उसने हीं कहीं छुपा दि हो तो सोचों उस इंसान पर क्या बीतेगी जिसने ऐसा किया हीं न हो!! आपको तो वो चीज़ मिल भी गयी थोड़ा इधर-उधर देखने पर और आप पहले की तरह जीने लगे लेकिन,उसका क्या जिसको आपने उस कुछ पल में महसूस करवा दिया..आपके लिए भले हीं वो एक छोटी सी बात हो सकती हैं लेकिन किसी की वजह से आप किसी को दुःख पहुँचा दो ये बिल्कुल गलत बात ही हैं!!

Favouritism…अर्थात पक्षपात ये तभी आती हैं हमारे मन में,हमारे व्यवहार में जब हम किसी को अपनी ज़िन्दगी में बहुत महत्व देने लगते हैं…किसी को ज़िन्दगी में अहमियत देना बुरी बात बिल्कुल नही हैं लेकिन बिना असलियत जाने किसी पर इल्ज़ाम लगाना या उसके बारे में मन ही मन में कोई धारणा बना लेना गलत हैं!! कहना यहीं चाहती हूँ मैं..अहमियत दो लेकिन इतना भी नही की आप जिसके लिए अहमियत रखते हो…उसके नज़र में आपकी इज़्ज़त,और आपके लिए प्यार कम हो जाये..प्यार,जज़्बात,स्नेह,और इज़्ज़त एक बार अपनों के दिल से चली जाती हैं तो फिर दुबारा उस तरह से नही बन पाती जैसा वो पहले हुआ करती थी!! ज़िन्दगी में सभी को उतनी हीं अहमियत देनी चाहिए जितना आप किसी खास को देते हैं!!क्योंकि सभी आपसे  किसी न किसी तरह से जुड़ें होते हैं!! Favouritism वाली ट्रिक से आप किसी एक को अपने बहुत करीब ला सकते हैं लेकिन इसके बदले में आप खुद उन सब से उतने हीं दूर होते चले जाते हैं जो आपसे बहुत प्यार करते हैं…क्योंकि जब आप बदलते हैं तो महसूस आपको नही होता बदलाव लेकिन आपसे जो दिल से जुड़े होते हैं वो ये बदलाव महसूस भी करते हैं और खुद किनारा भी करने लग जाते हैं आपकी ज़िन्दगी से…

सोच के देखें कभी ज़िन्दगी को गौर से तो वो आपको खुद इस कदर झकझोर के रख देगी की आप अपने अहम् में आकर जिस असलियत को नज़रअंदाज़ कर रहे थे वही आपको आपकी अहमियत दिखा देगी!!      

             

                                    2k16©आपकी…Jयोति🙏

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5 thoughts on “🌟Favouritism…

  1. मैने अहम् को मार रखा है…अहमियत भी न चाहता हो किसी को मेरी…फिर भी कोई रूकता नही असलियत में

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