🌼यादें वो पुरानी..

अजीब लगता हैं सब सोच के…बहुत अजीब…जितना भी सोचती हूँ,उसमें हीं रमते जाती हूँ मैं बस!! क्या कहूँ…कैसे कहूँ…किससे कहूँ…बस इन्हीं सब सवालों में उलझ के रह जाती हूँ मैं तो!! 

          मैं..परेशान हो गयी हूँ..तंग आ गयी हूँ…अपनी सोच को सोच-सोच कर!! मैं क्यूँ इतनी भावुक हूँ..जबकि मुझे अच्छे से पता होता हैं कि कौन मेरा इस्तेमाल कर रहा..फिर भी मैं उनकी बातों में आकर उनके लिए वो सब करती हूँ जो हमेशा से करते चले आ रही!! अब बस…सबकुछ छोड़ के बहुत दूर चले जाना चाहती हूँ..इतनी दूर की कभी भी उनसब से मिलूँ हीं नही जिनके नज़र में मेरी अहमियत न कभी थी..न होंगी!!

मैं क्यों सब जानते हुए भी बेवकूफ बनती हूँ हमेशा..मुझे पता होता है कौन क्या कर रहा..कौन मेरे बारे में क्या सोच रहा..फिर भी मैं उनका वैसे हीं ख़याल रखती हूं;फ़िक्र करती हूँ..जैसा हमेशा से करते आयी हूँ…ऐसा नही की मैं खुद को बदलना नही चाहती..बहुत कोशिश करती हूँ लेकिन मैं हर बार असफल हीं रहती!! क्या करूँ मैं नही हूँ उनके जैसे की बदल जाऊँ… रिश्तों से विश्वास उठते जा रहा हैं.. दुनिया सच में बहुत मतलबी है और यहाँ के रिश्ते खोखले…

शायद अब उनकी सोच में मैं वो नही जो पहले थी…या अब भी मैं गलत हीं सोच रही…उनकी सोच हमेशा से मेरे लिए ऐसी हीं रही होगी!! खैर! गम इसका नही की तेरी सोच में मेरा किरदार कैसा है?? गम सिर्फ इसका रहेगा ज़िन्दगी में की काश! तुम तो मुझे समझ पाते…मैं जब तुम्हारी हर बात बिना कहे समझ जाती फिर तुम क्यूँ नही…जो भी हो खुश रहो हमेशा!!
                              

                            2k16©आपकी…Jयोति🙏

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