🌸हाँ हूँ मैं लड़की…

…कहते थे न ज्यादा न पढ़ाओ इसे लेकिन मेरी सुनता कौन हैं यहाँ…देख लो अब ज्यादा पढ़ने का असर हर बात पर तर्क करती हैं, बहस करती हैं,.. इसका तो आदत में शुमार हो गया हैं हर बात में अपनी दखलंदाज़ी करने का!! भगवान् जानें क्या इज़्ज़त रह जायेगी हमारे खानदान में जब ये लड़की किसी और के घर जायेगी और ऐसे हीं बड़बोले बोल में बातें करेगी…इ सब तो सोच के हमको नींद नही आता हैं रात में…सब गलती इसके माँ-बाप और इसके भाई का हैं, जो इसको सर पर चढ़ा के रखा हैं…

सुनो!!…इधर आओ ज़रा तुम सुभाष की बेटी हो न…मैंने हाँ में अपना सर हिलाया..तुम्हारे पापा बहुत अच्छे आदमी हैं, सबसे बहुत अपनापन रखते हैं…और तुम्हारा दू गो भाई हैं न मैं सब सुनती हुई बस इतना सोच रही थी..जब इनको सब पता हैं, फिर ये मुझसे क्यूँ पूछ रही हैं..फिर मैं जैसे हीं जाने के लिए उठने का प्रयास किया तो मेरा हाथ जोर से उन्होंने पकड़ते हुए कहा….अरे! बैठो न हम तुमको ई कहना चाह रहे हैं कि तुम जो यहाँ आये सब लड़कों,बच्चों  से बात कर रही हो इ सब सही नही लगता…मैंने उनको आँखें तरेर के देखा तो वो आंटी समझ गयी मेरी आँखों से कहीं वो बात जो मैं कहना चाह रही थी…फिर वो बोलती हैं तुम लड़की जात हों..ये सुनते हीं मुझे अचानक से हँसी आ गयी…एक्चुअली मुझे उस वक़्त “रविश कुमार” की याद जो आ गयी थी!! खैर! उसके बाद की बातें भी तो सुनिए..उसके बाद सुनने को मिला आवाज़ नीचे कर के बोलो,सबके साथ हँस के बात मत करो,और तुम्हारा दुपट्टा कहाँ हैं…और बच्चों के तुम यूँ जो फोटो लिए फिर रही इ तनिको शोभा नही दे रहा…और उ लड़का कौन है जिसके साथ तुम उहाँ बैठी रही कुर्सी लगा के..इस पर मैं बोली वो मेरा भाई हैं.. मामाजी का लड़का!! अच्छा-अच्छा ठीक हैं लेकिन उसके साथ बैठने का क्या जरुरत हैं तुम हम औरतों के साथ भी बैठ सकती हों…मैं कुछ बोलने हीं वाली थी की फिर से उन्होंने मुझे रोकते हुए कहा शादी बियाह का घर हैं..ऐसे मत घूमो चार लोग देखेंगे क्या कहेंगे..कल तो तुम्हारा भी शादी होगा,कौन करेगा तुमसे शादी..मैं मन ही मन हँसते हुए सोच रही थी…क्या मेरे सिर्फ यूँ बात करने,हँसने,बच्चों के साथ खेलने और इन औरतों के बीच न बैठ(अंजान औरतों) कर अपने भाई के साथ बैठने मात्र से मुझसे कोई शादी नही करेगा…लिखने बैठ जाऊँ तो शायद मैं इस समाज के कुछ संकुचित सोच के लोगों पर उपन्यास हीं लिख दूँ….

लेकिन…एक बात हैं,मैं खुद को बहुत खुशकिस्मत हीं समझती हूँ की मुझे भैया जैसा बड़ा भाई मिला..जो सिर्फ मेरे भाई नही मेरे सबसे अच्छे दोस्त हैं बचपन से लेकर आजतक…संगी-साथी तो बहुत बने लेकिन दोस्त तो बस एक हीं है मेरा हमेशा से!!

अब आपलोग ये सोच रहे होंगे की मैं अचानक से अपने भाई का ज़िक्र कैसे ले आयी…अरे! यार उस वक़्त भी बस मुझे अपने भैया का ख्याल आ रहा था…सिर्फ यही सोच रही थी मैं..मेरे भी कितनी सहेली है जो मुझे हमेशा बोलती थी की ये सोशल साइट्स के बारे में तुम्हे कौन बताया…मैं बस उनको इतना हीं बोलती भैया हीं सिखाये हैं… उनका जवाब होता तुम्हारे भैया इनसब के लिए मना नही करते..मेरे भैया तो मेरे मम्मी-पापा के साथ मिलके तो..मैं उस आंटी की बात सुनके अंदाजा लगा ली की कैसे-कैसे लोग है यहाँ!! ऐसा नही है कि मेरे घर पर सब सामान्य हैं..इस तरह की बातें अक्सर मेरे घर में भी करते हैं कुछ लोग…लेकिन,फिर भी फ़रक नही पड़ता उसका मुझपे थोड़ी देर ये सब सुन के विचलित जरूर हो जाती हूँ,फिर ये सोचती हूँ मेरे ठहाके पर विराम आप क्या लगाओगे इन हँसी से हीं तो मेरे शहर में रौनकें हैं!!

मैं बेबाक,बेधड़क,बेहिसाब,…अपनी बातें रखती हूं लोगों के सामने बिना डरे,सहमें तो इसको लोग बतमीजी का नाम देते हैं!! लेकिन क्या फर्क पड़ता हैं… भैया ने हमेशा से एक बात हीं सिखाया हैं जो गलत है उसको गलत कहना सिखों और अपनी बातें हमेशा लोगों के सामने रखो जो सही हैं!! लोगों में सीख अक्सर उनके माता-पिता भरते हैं.. लेकिन मुझे माँ-पापा से बस संस्कार मिले हैं…. ज़िन्दगी को जीना मेरे भाई ने सिखाया हैं!! 
“तुमने मेरी औकात ज़रा कम आंकी हैं..मैं बताउंगी मेरा पैमाना क्या हैं!! टोकने वालों ज़रा परे रहो वर्ना..जानोगे इरादों से टकराना क्या हैं!!

                              2k16©आपकी …Jयोति🙏

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28 thoughts on “🌸हाँ हूँ मैं लड़की…

      1. आपकी पोस्ट में एक गज़ब की सकारात्मकता है और जहाँ सकारात्मकता है वहाँ सलाम तो है ही।

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  1. आपका ब्लाग पढ़ना एक अलग सा सुकून देता है…हर एक बात को इतनी ख़ूबसूरती से कहना..पल भर के लिये जैसे मैं भी उन पात्रों के बीच बैठा हूँ ..और यह एक बेहतरीन लेखक की पहचान है…भविष्य की ढेरों शुभकामनायें आपको :))

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