🌼तन्हाई…


तुम ने बस यूँ कह दिया लोगों से की हम तन्हा जीते हैं कभी न पूछा हमसे की क्यूँ हम ऐसे जीते है??

दर्द में भी देखा था तुमनें हमें कई-कई बार..
पर उसे बाँटने भी तुम न आ सके एक बार!!

आँखों से मोती झरते रहें हर बार…
पर तुमनें उन्हें बटोरना भी जरुरी न समझा एक बार!!

गैरों के दर्द को अपनाते रहे..
और मुझ अपने को झुठलाते रहे!!

हमें तो लगता था करीब से पहचानते हैं तुम्हे..
लेकिन हकीकत ये रही की तुम्हें जान न सकें हम कभी!!

पोछ लेते हैं हम आँसू सभी..
जो तुमनें सारे हमें उपहार में दिए थे कभी!!

मेरी तन्हाई को तुम न समझ सकें कभी..
..की;क्यों तन्हा जीते हैं हम यहाँ सभी!!


                      2k16©आपकी…Jयोति🙏

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67 thoughts on “🌼तन्हाई…

  1. पोछ लेते हैं हम आँसू सभी..
    जो तुमनें सारे हमें उपहार में दिए थे कभी!!

    I admit i am limited to whatever google translate says to mean, but i like the lilne even in my imperfect ability to hear it’s meaning. 🙂

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  2. ये बदलाव अच्छा है..कविता की दुनिया में स्वागत है आपका.. अच्छी कोशिश की.. धीरे-धीरे और भी निखार आयेगा कविताओं में क्योंकि जिस ज्योति को मैं जानता हूँ वो बहुत ही प्रतिभाशाली है..एेसे ही बस क़लम से धमाल करती रहो..ढेरों शुभकामना आपको 🙂

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  3. मैं और मेरी तन्हाई अक्सर यें बातें करते हैं,
    अगर ज्योति न होती इस एेप पर तो न जाने क्या होता हम लोगों का यहाँ……😀😀😀😀😀😊👍

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  4. वाह, क्या बात हैं बहुत खूबसूरत पंक्तियों में पेश किया हैं अपने ज्योति जी

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  5. The translation I got seems distorted, but I think it is about a person describing experience with someone’s loneliness account. A hermit. IE the writer puts self in the shoes of such a individual asking for the receiver of the staged probability to experience some sympathy, empathy? Thank you.

    Liked by 2 people

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