🌼..ज्योति हूँ मैं!!

इनदिनों खुद से हीं अंजान हूँ..
हाँ आजकल थोड़ी परेशान सी हूँ मैं!!

कुछ मुक़द्दर ने दिये और कुछ खुद से हीं लिए..

आजकल गमों से  भी सराबोर हूँ मैं!!

बह चलते हैं आँखों से मोती सारे..

इनमें लिए समंदर का भूचाल सी हूँ मैं!!

ज्वाला सी धधकती रहती..

मानों सुलगती मशाल सी हूँ मैं!!

डर को मन के कोनों में छिपाया हैं..

हाँ मुश्किलों में भी जांबाज़ सी हूँ मैं!!

लोगों ने हर पैमानें पर परखा हैं मुझे..

जैसे यहाँ कोई बवाल  सी हूँ मैं!!

ज़माना भले जकड़े मेरे ख़्वाबों को जंजीरों में..

मगर मन के आसमाँ में तो आज़ाद सी हूँ मैं!!

रातों के अँधियारो में हूँ तन्हा मगर..
दिन के उजालों में तो खूबसूरत एहसास हूँ मैं!!

अनसुलझी सवाल सी हूँ मैं..
हाँ आजकल थोड़ी परेशान सी हूँ मैं!!

❤वैसे जो भी हों थोड़ी तो लाज़वाब हूँ मैं!!!!
            

                   2k16©आपकी….Jयोति🙏

Advertisements

105 thoughts on “🌼..ज्योति हूँ मैं!!

  1. ज़माना भले जकड़े मेरे ख़्वाबों को जंजीरों में..

    मगर मन के आसमाँ में तो आज़ाद सी हूँ मैं!!
    बहुत अच्छी कविता है …😎😎😎😎

    Liked by 1 person

      1. Je vais bien merci, je pense souvent à toi, l’Inde c’est si loin mais tu à l’air si proche de moi dans tes pensées !!!

        Like

  2. लाजबाब तो आप सच में हो और आपकी रचनाएँ भी लाजबाब हैं पर कभी हमारी गलियों में भी आया करें हमने आपके लिए शब्दो के कॉरपेट बिछा रखे है इस आश में की आप आएंगे और अपने प्रतिक्रिया रूपी चाँद तारों से हमारी गलियों को रौशन कर देंगे।

    Liked by 1 person

  3. मन के अंतर्द्वंद को बहुत ही अच्छी तरह व्यक्त किया..कितनी भी मुश्किल आये..कभी घबराना मत..और वैसे भी आपके ख़ुद के भरोसे पर मुझे यक़ीन है क्योंकि जितनी गहराई से आप लिखती हैं उतनी ही ज़्यादा आप समझदार भी हैं ( एेसा मेरा मानना है ). आप ने अपने को कम करके आँका..बहुत लाजबाब हैं आप 🙂

    Liked by 1 person

  4. ये बेहतरीन है ज्योति जी.सच में,दो चेहरे हैं…वो बहोत गजब का है.👏👏😘😘उसके बाद का फिर सब अर्थपुर्ण है व्यवस्थित ढंग से चुने हुने शब्दो से सुसज्जित.
    ईसी को मैने लिखा था..शब्द चुनता हूँ कलम से शब्दो के गीत बुनता हूँ
    और बहोत अच्छा चुना है और बुना है आपने.
    ज्योति में ज्योति रहे..यूँ ही शब्दो को पिरोती रहे.

    Liked by 1 person

      1. ज्यो थी त्यो थी..बदली नहीं है ज्योति…..
        फिर शुक्रिया न कहियेगा..बस आप लिखते रहियेगा

        Liked by 1 person

      1. Quel dommage j’ aurais bien aimé te voir juste pour savoir à qui je parle à l’autre bout du monde car c’est quand même plus humain…moi tu pourras me voir dans ma biographie, c’est quand même plus respectueux que de parler à un ordinateur…😁😁😁😁

        Liked by 1 person

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s