🌼बदलाव इधर भी…

इनदिनों जहाँ देखो जिसको देखो सभी ये ज्ञान देने पर तुले हैं की लड़को को अपनी सोच बदलनी चाहिए और पाक साफ नियत रखनी चाहिए कोई भी लड़की दिखें उसको बस माँ,बहन की तरह हीं देखना चाहिए…कोई भी उलजुलूल हरकत करने से बचना चाहिए!! 

…मैं भी एक लड़की हूँ और मैं भी उसी समाज में जीती हूँ जहाँ आये दिन अपराध हो रहें हैं और उनका सारा दोष आजकल सिर्फ और सर्फ लड़को को दिया जा रहा हैं…वो कहते हैं न की ताली कभी एक हाथ से नहीं बजती हैं और ये सही भी हैं ;अगर बातों को गौर से सोचा जाये तो!!…हम भारतीय हैं और हमारी पहचान दूसरों देशों में हमारी संस्कृति और संस्कार से हीं होती हैं, लेकिन क्या अब भी वो संस्कृति और संस्कार उस मात्रा में दिखाई देती हैं हमारे समाज में…एक सदी से यहाँ पर भी हम लड़कियों को भी हमारे घर वाले औऱ समाज के लोगों से पूरी स्वतंत्रता दी गयी हैं लेकिन उसका गलत इस्तेमाल तो हमने हीं किया हैं… 

आज मैं भी सोशल साइट्स पर एक्टिव रहती हूँ और बहुत से जगहों पर भी देखती हूँ बहुत सी लडकियां भी बेझिझक,बेधड़क बिना कुछ सोचे समझे ऐसी ऐसी गालियाँ देती हैं जिनका मतलब इतना भद्दा होता हैं कि खुद की नज़रे हीं झुक जाती हैं… जब आप खुद अपनी इज़्ज़त अपने मुँह से नहीं कर सकती हैं तो दूसरों से कैसे उम्मीद हम लगा सकते हैं कि वो हमारी गालियां और भद्दे कमेंट सुन के भी हमारे बारे में अच्छी सोच रखेंगे…अपनी मर्ज़ी से कपडे पहनना बुरी बात नहीं हैं लेकिन कपडे का मतलब होता हैं तन ढकना न की उसे दिखाना…हर कपड़े को सलीके से पहनना जरुरी हैं!!अगर हम दूसरों से ये उम्मीद करते हैं कि वो हमारे बेढंगे तौर-तरीकों को नज़रंदाज़ करें तो क्या ये संभव होगा?? नहीं बिलकुल नहीं हो सकता…उस बेढंगेपन को हमारे भाई हीं पसंद नहीं करेंगे फिर हम दूसरों से ये उम्मीद कैसे लगा लें कि वो ऐसे अवस्था में भी हमें अपनी बहन समझें!!

सोच तो हमें भी सही रखनी होगी,जब एक लड़की माँ-बहन की गाली देने ने परहेज़ नहीं कर रही,तो सुनने में भी परहेज नहीं होना चाहिए उन्हें…तभी संभव हैं हमारी इज़्ज़त को इज़्ज़त मिलना जब हम खुद अपनी इज़्ज़त करेंगे!!

                              ©2k17आपकी…Jयोति🙏

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80 thoughts on “🌼बदलाव इधर भी…

  1. पिछली वाली रचना के साथ इस रचना ने आपकी सोच का स्पष्टीकरण किया। अभी दोनो को एक साथ देखा तो ज्यादा अच्छा लगा।👍

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    1. आभार ऋषभ आपका..आपको पसंद आया अच्छा लगा जान कर..कमियाँ भी बता दिया करें… अच्छा लगेगा हमें!!😊

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      1. कमियाँ किसी लेखन में नही होतीं । क्युकी कमी relative शब्द है। किसी के लिए कोई चीज़ उतनी ही अच्छी हो सकती है जितनी किसी और के लिए ख़राब। बस आप पूरे ह्रदय और तजुर्बे के साथ लिखते रहें और आप “अपने हिसाब से” अच्छे को बहुत अच्छे में तब्दील करते रहें। 🙏

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  2. ज्योति जी जो आपने अपने ब्लाग में लिखा वही बात अगर कोई पुरष लिखे तो उसे आज के जमाने में रुढीवादी और औरत को दबा कर रखने वाला समझा जाता है।
    आप धन्यावाद की पात्र है जो आपने समाज की इस “टीस” का बखूबी वर्णन किया है जिस पर किसी के लिए खासकर पुरषो के लिए तो बहुत ही मुश्किल है।
    लड़कीयो को शालीनता का परिचय देना चाहिये क्यूंकि वे लड़को से हर प्रकार से बेहतर होती है। पंरतु आजकल लड़कीया खुद को साबित करने के चक्कर में वो सब काम कर जाती है जिस से कहीं ना कहीं आगे चलकर उनको नीचा देखना पड़ता है।
    पर सिर्फ ये कहना की सब सुधार लड़कीयो को ही करने है यह गलत होगा। हम लड़को को भी अपनी सोच को बदलना होगा।
    लड़कीयो को जाने अनजाने कुछ गलत करने की हिम्मत लड़के ही देते है चाहे वो किसी भी रुप मे हो और वो तकरिबन हर एक गलत हरकत के लिए की गई झूठी खोखली तारीफ रे रुप मे होती है।
    Freedom of expression के नाम पर आज वो सब बोला जा रहा है जिसकी हमारे समाज में कभी कोई जगह नही रही।
    उम्मिद है आपके लिखे ब्लाग की बातें बहुत लोगों तक पहुंचेगी और लोगो की सोच बदलने मे सहायक होगीं।
    ठाकुर जी आप पर कृपा करें 🙏🏻🙏🏻

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद आपने अपना कीमती समय निकाल कर इसे पढ़ा…और आपसे मिल कर बहुत अच्छा लगा…आप सब अच्छे विचारों वालों का साथ हीं आगे बढ़ने की प्रेरणा,और संबल प्रदान करता हैं मुझे…बहुत कुछ सीखना हैं मुझे आपसे…एक-एक कर के आपके ब्लॉग हीं पढ़ने बैठी थी की आपसे रुबरु होने का मौका मिला…आभार💐

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      1. धन्यावाद आपका।
        समय निकाल कर मैं भी आपके सभी ब्लाग पढ़ूगा।
        और आप हम से कुछ सीखें ये सूर्य रो दीपक दिखाने समान होगा 🙏🏻🙏🏻
        आप अच्छा लिखतें है बहुत 😊

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      2. सर…ये तो आपका बड़प्पन हैं…और कोशिश हमेशा रहेगी की आपसे हमेशा जुड़ी रहूँ..और भी बेहतर लिखना सिख लूँ आप से!!

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  3. आपने बहुत ही अच्छा लिखा है। एक बार फिर कहूंगी इस समाज को आईना दिखाने के लिए आप जैसे संसकारी पीढ़ी की बहुत आवश्यकता है। दब मन से कोई पेरेंट्स छोटे और भद्दे कपड़े पसंद नहीं करते हैं। पर लड़के बनने होड़ में बच्चों के सवाल जवाब से पेरेंट्स विरोध नहीं कर पाते हैं। मेरा मानना है कि लड़की को लड़के से कम नहीं रहना चाहिए। पर कम से कम लड़के जितना कपड़े पहन ही लेना चाहिए। मेरी बेटी नहीं है पर आपमें मेरे विचारों और संस्कारों की छाप है। आज मुझे आप जैसी बेटी मिल गई। जो समाज को जरूर बदलेगी।

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    1. मैम मैं आपको बता नहीं सकती…ये लाइन “आपमें मुझे मेरी बेटी मिल गयी” सुन के आँख नम हो गयी हैं मेरी…मैं कोशिश करुँगी आपकी सब अपेक्षाओं पर खरी उतरने की!

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  4. मेरे मुँह की बात छीन ली है , गर लड़कों को बदलना है तो लड़कियों को भी अपनी हदें नहीं तोड़नी है , क्यूँ उन्हें लड़कों के साथ उन चीज़ों की बराबरी करनी है जिसकी ज़रूरत नहीं या यूँ कहें अपने स्तर को गिरने की कहाँ ज़रूरत है ?

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      1. बिलकुल सही .. आजकल एक तरफा फैसलों के पीछे चलने कि भेडचाल हो गयी है वैसे … ऐसे माहोल में आपका ये लिखना वाकई काबिल-ऐ-तारीफ़ है 🙂

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      1. बदलाव की उम्मीद से सारोबर और पोस्ट पढ़ने हेतु आतुर।
        उम्मीद हैं, जल्द कुछ और नए धमाके होंगे।
        मंगलकामनाएं 🙂

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  5. App bikul shi ho ki tali kabhi ek hath se nhi bajti do hatho de bajti ha yha PR bhi kuch ESA hi ha Sab se phela hath tali wala humari society ha jisne humesa ladkiyo kam samjha or unko judge kiya unke dressing sense or ladko ko sikhaya ki agar koi ladki chote kapde Dale to vo gult ha chance mar lo beta or phir dusra hath ata ha tali ke liye Jo Ki ladko ka ha or phir bajti ha tali or hota ha crime ………….

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    1. हम्म्म्म…सोसाइटी भी तो हम जैसो से हीं न बनी हैं.. कम कपड़े दिक्कत नहीं करते यहाँ…बस सलीक़े होने चाहिए हर चीज़ का…बकवास ड्रेसअप वाले पे क्या हम नहीं बोलते उन्हें..जब हम लड़की हो के ये सोच लेते हैं तो.. फिर सोच लो उनका…सोच तो दोनों तरफ बदलनी होगी!!😊

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    1. 😊😊जी धन्यवाद…बिल्कुल समाज दोनों के मिलने से हीं सुचारू रूप से चलता हैं फिर बदलाव के लिए कदम तो दोनों तरफ से सकारात्मक उठाना हीं होगा!!

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      1. उच्च तो नहीं है..बस मन की भावनाए यहाँ लिख देते हैं… धन्यवाद! आपने पढ़ा इसे और अपना कीमती समय दिया 😊😊😊

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  6. ये दुसरा पहलू है.पहला लिखा था आपने पहले ही.
    सच है छोटे कपड़े सुदंरता की गारंटी नही.सुदंरता और फुहड़ता में अंतर है.पुरे कपड़े पहनना भी पिछड़ापन नहीं.मर्जी आपकी है जो चाहे वो पहने पर साथ ही जिम्मेदारी भी है.खुद की जिम्मेदारी सबसे पहले आपकी खुद की ही है..
    लेकिन ईन सबका कोई ये भी मतलब नहीं है कोई छोटा पहने तो कोई वो भी ऊतार लें.ये हक भी किसी को नहीं है
    जिम्मेदारी दोनो की है.

    थैक्यु आपने दोनो को लिखा

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  7. Mere paas shabd NAHI h dhanyavaad khne k liye !
    Aise bhut SE Vichar mere bhi the jinhe shayad m khud khta to aur log gyan de jate mujhe hi 😁😁mgr apne ek lekhk k kirdar ko bakhubi nibhaya aur khulke SB Sach likh dia
    Bhut ache !👏👏🙏🙏🙏🙏

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