🌼 समाज के ठेकेदार!

#Society #Mentality #Blog #Life #truth

 खैनी बनाते हुए एक सज्जन अपने साथ बैठे मित्र को बाहर की ओर इशारा कर के बड़े बेहूदी हँसी हँसते हुए कहते हैं,देखिये सरकार ई हैं हमार नयी पीढ़ी और ये हमारे भारत को विकासशील देश से विकसित देश की श्रेणी में लाकर खड़ा करेंगें!! उन्ही के तरह ही थे,उनके मित्र भी सज्जन जो बाहर की तरफ देखकर बड़ी भद्दी सी गाली मुँह से निकालते हुए कहते हैं, हाँ देख हीं रहें हैं और रोज देखते हैं ये नज़ारा!! मुझे तो पहले लगा ऐसे हीं दोनों बात कर रहे हैं,लेकिन जब उन्होंने ने नज़ारे की बात करी तो मैंने कानों से हेडफोन बाहर निकाल कर बड़े ध्यान से उनकी बातों को सुनने का फैसला मन हीं मन में कर डाला!! दरअसल हमारा ऑटो रुका था सिग्नल की बत्ती लाल होने पर तभी ये सब वाक्या घटित हो रहा था…मैं भी उस नज़ारे को देखना चाहती थी,इसलिए मैं भी बाहर की तरफ नज़रें दौड़ाने लगी लेकिन मुझें कुछ भी ऐसा नज़र नहीं आया जो ऐसा अटपटा सा दिखे की उसके वजह से मेरा देश विकसित देश की श्रेणी से परे रह जाए!!खैर,मैं अब ध्यान से उनकी बात सुनने की ठानी हीं थी की उतने में खैनी मुँह से थूकते हुए वो सज्जन कहते हैं देखिये ,कैसे वो लड़की सफ़ेद पहन के दाग लगा रही हमारी संस्कृति पर…अब मैं समझ गयी की किस नज़ारे की बातें हो रही थी यहाँ!! सड़क पर एक बाइक पर एक लड़का अपने महिला मित्र के साथ बैठा था और चूंकि सिग्नल पर गाडी रुकी थी तो दोनों बात कर रहे थे,यही दृश्य उन्हें नागवार गुजर रही थी!! 

वो भी इतना की उस लड़की के साफ़-सुथरे सफ़ेद वस्त्र भी उन्हें दागदार नज़र आने लगे! फिर मुझे उन दोनों की बातों से पता चला की ये हमारे सभ्य समाज के वैसे नागरिक हैं जो गलत चीज़ देख कर बर्दास्त नहीं करते हैं-और इसके बहुत सारे उदाहरण उन्होंने पेश भी कर दिए..जिसमें मुझे सबसे अच्छा जो उनकी उपलब्धि लगी वो आपके साथ साझा कर रही हूँ! दो दिन पहले हीं उन्होंने ये नेक काम किया हैं…अरे! मैं 14फरवरी की बात कर रही! उस दिन इन्होंने कई जोड़ो को साथ घूमने पर पाबंदी लगाई थीं, यहाँ तक की किसी ने विरोध किया तो उनको कूट भी डाला वो भी अकेले नहीं इनके ग्रुप हैं भई! ऐसे वैसे लोग नहीं थे दोनों जैसा वो अपनी शान में हाक रहे थे ऐसा अनुभव हो रहा था उनकी बातें सुन कर मुझे और मेरे सहयात्री को भी…उस वक़्त ऑटो में 6 लोग सवार थे हम! जिसमे ड्राइवर सहित 5लोग की उम्र 40+ था! और सभी पुरुष थे और जो आंनद लेकर उनकी बखान सुन कर खिलखिला तो रहे थे हीं साथ में शाबाशी भी दे रहे थे…मैं ये सब सुन रही थी और मेरे मन में अनेकों विचार आपस में हीं लड़-झगड़ के मस्तिष्क को ही पीड़ा दे रहे थे…बहुत कुलबुलाहट हो रही थी मेरे मुंह में की कुछ बोल दूँ,लेकिन तभी मेरे बड़े भाईसाहब की एक बात याद आ गयी मुझे की अपनी एनर्जी और अपनी पाक सोच वहाँ खर्च करो जहाँ 1% भी सुधार होने की गुंजाइश दिखें, वर्ना मुँह बंद रखने में हीं समझदारी हैं! और मुझे सच में वहाँ 5लोग में से एक भी ऐसे नहीं दिखे जो बात समझते अगर मैं कुछ बोलती तो क्योंकि जिन लोगों को अपनी बेटी के उम्र की लड़की के सामने इतनी गन्दी गालियाँ मुँह से निकालने में परहेज नहीं था वो क्या ख़ाक बात को समझेंगे वो भी लड़की की! खैर,मेरा घर आ गया था और मैं अब ऑटो से उतर कर घर जाने लगी लेकिन मेरे दिमाग में अब भी वही सब चल रहा था..बहुत सी बातें मन को बेचैन कर रही थी….

कितना कुछ एक साथ चल रहा था कि दिमाग की नसें फटने को थी,…“ये सभ्य समाज और यहाँ के लोग एक अंजान लड़की को अगर किसी लड़के के साथ घूमते हुए,बात करते हुए और एक-दूसरे की परवाह करते हुए देखते हैं तो उनकी आँखों को ये सब किरकिरी सी लगती हैं,जबकि इसमें गलत तो कुछ भी नहीं होता हैं…वो अपनी मर्ज़ी और एकदूसरे की सहमति से साथ वक़्त बिताते हैं जिसमे इन महानुभावों को इतनी तकलीफ होती हैं कि वो उन्हें गन्दी नज़र से देखते तो हैं हीं साथ हीं उनके चरित्र का भी चित्रण अपनी गन्दी जुबान से कर देते हैं! और ऐसा वो अकेले नहीं करते उनके समर्थन में पूरा का पूरा कुनवा हीं होता हैं,और इतना हीं नहीं ये अपने दल-बल के साथ मिलकर इनका सरे राह फैसला भी कर देते हैं,वही अच्छा सा फैसला की जल्दी से ये सब बंद करो लड़को के साथ घूमना-फिरना की ये हमारी संस्कृति के खिलाफ हैं….लेकिन,जब वही अंजान लड़की अकेले होती हैं तो बिना उसके मर्ज़ी के हीं उसपे फब्तियाँ कसना,छेड़ना और जब नहीं मानें तो उसके चेहरे पर तेजाब फेंक और उनके साथ कुकृति कर ये समाज के ठेकेदार फैसला देते हैं और इसका विरोध करने कोई दल नहीं आता आगें जबकि उस वक़्त तो विरोध को ऊर्जा देने बहुत से लोग और दल आगे आये थे जब लड़की अपनी मर्ज़ी और खुशी से किसी के साथ खुश थी!! शायद, हमारी भारतीय संस्कृति में होगा लिखा कहीं की अनजान लड़की से छेड़खानी कर के उसको परेशान कर सकते हो और आखिर में उसके चेहरे पर तेजाब भी डाल सकते हो,और इसके लिए कोई दल या समाज का ठेकेदार तुम्हें कुछ नही कहेगा। क्योंकि वो हमारी संस्कृति का अटूट और गौरवशाली हिस्सा है!!

P.S-Google

❣EmotionalQueen All Rights Reserved©

                         2K17©आपकी…Jयोति🙏

Advertisements

56 thoughts on “🌼 समाज के ठेकेदार!

  1. फ्रैंड बाहर खड़ा था गेट के पास.मैं पंडित के पास..बाद में वो बाहर आई.भाई बहन मिले

    पंडित जी जितनी सोच उतना समझ लिए.अपना शुरू हो गये है.समाज को गंदा कर रही है.क्या पहनी है राम राम.दो चार चेले भी आ गये फिर.वो सब भी शुरू मार पीट कर सुधार देने तक बात चली गई.
    मुझे हँसी आ गई अता पता ईनमे से किसी को कुछ नही.ऐसे ऐसे तो समाज सुधारक भरे पड़े है

    Liked by 1 person

      1. लेकिन ज्योति जी ईन्ही सबसे सीखने को भी मिलता है मैं भी कई जगह गलत था ईन्ही सबकी बजह से एहसास हुआ कि मैं कहाँ कितना गलत था..अँधेरा तो रहेगा ही दुनिया में लेकिन अँधेरा भी कोई न कोई सीख दे जायेगा और हर बार कोई न कोई ज्योति आयेगी ही उसे मिटाने के लिए😊

        Liked by 1 person

  2. प्रिय ज्योति, …अच्छा लेख है. बधाई.

    आज करीब ७० साल का हो गया, पर मेरी जवानी के दिन मुझे याद हैं. मैंने भी प्यार किया है. प्यार करना गलत नहीं है.

    पर, अपनी मर्जी से भी, जवान लड़का और लडकी, शादी के पहले घूमना मैं इसलिए नहीं स्वीकार करता, क्योंकि कोई गारंटी नहीं है, कोई गारंटी नहीं है, कोई गारंटी नहीं है, कि बातें गलती में न ख़त्म हों.

    हर कोई, हर कोई, हर कोई कहता है हम लोग वैसे नहीं हैं. मेरा मतलब नहीं कि इस प्रकार के सभी रिश्ते गलती में ख़त्म होते हैं, पर कईयों के साथ यह होते हुए मैंने देखा है, और वह दर्द मेरे अपनों को न मिले, यही मेरी कामना है.

    PS: कृपया छोटी paragraphs में लिखो. पढने में आसान रहेगा.

    प्यार एवं आशीर्वाद.

    Liked by 1 person

    1. आदरणीय,..सर! मैं भी इसी समाज का हिस्सा हूँ औऱ मैं इस बात को समझती हूँ की हर चीज़ का समय होता हैं,लेकिन मैं सिर्फ इतना कहना चाह रही की जिस तरह हम इसका विरोध करते हैं..उसी तरह उस वक़्त भी हमें आगे आना चाहिए जब सच में किसी लड़की को जरुरत हो आपके साथ की! वैसे मैं आपके विचार से सहमत हूँ क्योंकि मैं जिस परिवार से हूँ वहाँ भी कुछ ऐसे हीं विचार हमलोगों में डालें गए हैं और हम अपनी मर्यादा में रहने की हीं कोशिश करते हैं… और जी मैं अब से छोटा हीं लिखने का कोशिश करुँगी…आपके आशीर्वाद,साथ की सदैव जरुरत रहेगी! आप ऐसे हीं मुझे मेरी गलतियों को बताया करें…बहुत अच्छा लगता हैं मुझें जब मुझे मेरी गलतियों के लिए बड़ो से आशीर्वाद रूपी सीख मिलती हैं तो…चरण स्पर्श आपको!

      Liked by 2 people

  3. Aaj ki nahin yeh pratha toh humare samaj mein sadiyon se hai , Rajasthan mein ek pata sanskriti hua karti thi jo ki TV ke aur cable ane ke baad lupt ho chuki hain wahan ganv ke aise kuch asamajik aisa hi kam karte the , kaun stri kitni bar gharse nikali , kiski beti kahan gai , kab gai .. bas ye log aise hi Sanskriti ko agei badha rahe hain . Farq itna sa hai we sabhya thei aur ye asabhya

    Liked by 1 person

  4. एक अच्छा लेख.. ये आम बात है.. हमारे सो कॉल्ड सांस्कृतिक लोग पूजा तो राधा-किशन की करते हैं पर शादी से पहले लड़के लड़की के मिलने पर इन्हें आपत्ति होती है

    सीता माँ तो होती है पर हर लड़की भोग-विलास की ही वस्तु समझी जाती है

    हमारा समाज है ही दोगला

    आपकी लेखनी के लिए साधुवाद 🙏🙏

    Liked by 1 person

  5. नकारात्मक , मानसिकता के लोग कभी अच्छे विचार अपने मन में नही ला सकते , ये अहंकार और ईर्ष्या नामक गम्भीर बीमारी से ग्रस्त होते है जहाँ भी जाते हे वहाँ के वातावरण को दूषित करने में लगे रहते है …..इनसे दूरी ही बना कर चलें !

    Liked by 1 person

      1. हाँ करना तो चाहिए और अब सिर्फ सोचने से नहीं होगा पहल करनी होगी…वैसे भी बहुत देर हो चुकी हैं!

        Liked by 2 people

  6. wow..ye kya bat kahi hai,,,अपनी एनर्जी और अपनी पाक सोच वहाँ खर्च करो जहाँ 1% भी सुधार होने की गुंजाइश दिखें, वर्ना मुँह बंद रखने में हीं समझदारी हैं! …excellent..

    Liked by 1 person

  7. I’ve said it before and I’m saying it again, your thoughts and your thinking is just great.
    Itna acha toh khod Modi bhi nahi bolte hain. Try karogi toh kya pata agli PM ban saktki ho😜😜😜
    Anyways, jokes apart, very well said!

    Liked by 1 person

  8. ये खैनी वाले सज्जन वही हैं जो गलत होते नहीं देख सकते,इसीलिए जब भी किसी दामिनी के साथ कुछ गलत हो रहा हो,तो ये लोग वहां से हट के घर चले जाते हैं। अगले दिन ऑटो में बैठे बैठे सामने कोई प्रेमयुग्ल दिख जाये तो बुरा लगता है,गलियाते हैं।

    Liked by 1 person

  9. सही है. आज के हमारी बदलती संस्कृति वास्तव में दो रंगी हो गई है. जिसका खामियाजा युवावर्ग

    Liked by 1 person

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s