…मन की पूछो!!

#innocence #happiness #life #blog 

माँ के साथ आज बहुत दिन बाद बाहर जाना हुआ! कभी मुझे वक़्त नहीं मिलता था उनको देने को तो कभी वो गृहस्थी के झमेलों के बीच से वक़्त नहीं निकाल पाती हैं,कि मेरे या भाई के साथ बाहर जाए…बस,उनका हमेशा कहना होता हैं देख लो बेटा! जो तुमलोग को अच्छा लगे ले लेना मेरे लिए भी…और हमलोग हमेशा ऐसा हीं करते आये हैं! खैर,आज तो हम साथ थे एक-दूसरे के तो अच्छा लग रहा था…माँ ने आज बहुत खरीदारी की और मजा भी आया उनके साथ समय बिता कर,बहुत कुछ उनसे सिखने को मिला!! थकान हो रही थी और भूख भी लगी थी…लेकिन आसपास कुछ भी नहीं दिख रहा था जहाँ भूख को विराम दिया जा सकें…फिर,दूर सड़क किनारे छोटी सी दुकान दिखी जहाँ पर कुछ खाने का सामान मिल रहा था और आसपास  और भी कई तरह की दुकानें सजी थीं…मैं वहां जाकर देखने लगी की क्या-क्या खाने को मिल रहा हैं तभी माँ भी आ गईं वहाँ और उन्होंने साफ़-साफ़ मना किया कि वो कुछ नहीं खायेंगी इसलिए उनके लिए कुछ आर्डर न करूँ..मैंने अपने लिए एक मसाला डोसा आर्डर किया और फिर इंतज़ार करने लगीं उसके आने का..
..तो अब मेरे पास करने को कुछ न था,तो मुझे थोड़ी दूर एक ठेले पे कुछ खिलौने दिखें, जिन्हें देख के अक्सर मैं आकर्षित होती हूँ आज भी हुई और चल दी उस ओर देखने चुकी आज माँ थीं साथ में तो और भी मन बचपन की गलियों में घूमने लगा…माँ और मैं वहां पहुँचे और मैं देखने लगी कुछ खिलौने तभी मुझे ऐसा भान हुआ मानों कोई मुझे पीछे से छू रहा…पीछे मुड़ी तो एक यही कोई 10 साल का बच्चा दिखा जिसे मैंने देखते हीं पूछा क्या हुआ तुझे?? उसने बोला दीदी मुझे भी दिला दो न कुछ…मैंने माँ को देखा तो माँ ने इशारों में हामीं भरी तो मैंने उसे देखते हीं बोली हाँ दिला दूँगी जाओ उस दूकान में अपने लिए खाने की चीज़ खरीद लो मैं दे दूँगी पैसे…

~नहीं मुझे वो सब नहीं चाहिए और मुझे भूख भी नहीं हैं!

~तो तुझे क्या चाहिए?? 

~मुझे वो चश्मा दिला दो दीदी!

~क्यों क्या करेगा तू उस चश्मा का,लगा के कहाँ जाएगा तू बता! बकवास हैं वो चल तुझे मैं कोई जरुरत की चीज़ दिलाती हूँ!

~दीदी! देखों मुझे चाहिए तो वो ही चश्मा अगर नहीं दिलाना तो बोल दो मुझे!

~अच्छा! इतनी अकड़ हैं तूझमें!

~नहीं दीदी..मैं सिर्फ इतना कह रहा की जरूरतें तो मैं खुद अपनी और अपने परिवार की पूरी करता हूँ लेकिन मन का नहीं कर पाता! यहाँ सब जरूरतें हीं देखते हैं मेरी और मैं खुद भी खुद की जरूरतें हीं देखता हूँ!! कभी यहाँ कोई मन की नहीं पूछता हैं…आज मैं मन की करना चाह रहा इसलिए मुझे वो चश्मा चाहिए,मुझे लगाना हैं!! आप दिलवा दो न मुझें…मैं माँ के तरफ देखने लगी तो इतना दिखा की माँ बहुत भावुक हो चुकी थी..मैंने उस बच्चे को वो चश्मा दिला दिया..हालाँकि मैं,इतनी दयालु और दानी तो हूँ नहीं लेकिन, भावुकता पर मेरा भी कंट्रोल नहीं रहता! वो बच्चा वो चश्मा पाकर इतना खुश हुआ की उसकी खुशी हमारे चेहरे की हँसी बन चुकी थी!!

..और आज एक चीज़ और जान पायीं मैं की किसी की जरूरतें पूरी कर के हम उसको खुश नहीं कर सकते बस उन्हें संतुष्ट कर सकते हैं..असली ख़ुशी तो उन्हें हम उनकी मन की जरूरतों को पूरी कर के हीं दे सकते हैं!!❤

पतंगे सा मन अपनी ही धुन में उड़ता फिरे…बावरा जो बहके हर अर्जी को अनसुना करे!!❤



Image Source~Google

❣EmotionalQueen All Rights Reserved©


                  2k17©आपकी…Jयोति🙏

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73 thoughts on “…मन की पूछो!!

  1. Deep thought & wonderfully crafted….i like the message behind words.This is the best among i read from your pen Jyoti!!
    Zaroorat aur mann ki chah ke bich ka antar jis tarah darshaya woh toh beyond appraisal hai📝👌👌👌❤
    Tere ko spanish aur french aati hai kya😱

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      1. 😆😆😆 हिन्दी से तो मुझे जूनून के हद तक प्यार हैं…पढ़ाई के वक़्त तो ये रहा नहीं तो अब कोशिश हैं, सब कसर निकालने की!!

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      2. अच्छा! भैया से खर्च करवाने का कोई मौका न छोड़ने वाली मैं… आपकी बहन आपकी जितनी शरीफ थोड़ी हैं भैया…😂😂😂

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      3. O terii…maine pahle bhi bola hai na like bro like sis😄😄 profession bhi same…☺☺☺ और खर्च न भी करोगे फिर भी आपकी बहन आपको सबसे ज्यादा हीं प्यार करेगी लेकिन हमेशा!!

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  2. आह..यही बात मैं भी कई बार सोचती हूँ.. ज़रूरत और ख़ुशी के बीच का अंतर कभी या तो हम समझ नहीं पाते या वक़्त समझने की इज़ाज़त नहीं देता..
    काश किसी दिन राह में आपसे मुलाक़ात हो जाए
    और कुछ ख्वाइशों की हम पर भी बरसात हो जाए

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  3. मैं सिर्फ इतना कह रहा की जरूरतें तो मैं खुद अपनी और अपने परिवार की पूरी करता हूँ लेकिन मन का नहीं कर पाता! …..क्या भाव हे 👍👍👍

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